सन 1982 में जब अमिताभ बच्चन मौत के करीब थे, तब जया बच्चन ने लिया था जोखिम भरा फैसला

 तारीख 26 जुलाई सन 1982 जगह बेंगलुरु फिल्म कुली, ये वो गुजरा लम्हा है जिसे महानायक भूलना चाहते है. थम गई थी सांसे सिर्फ महानायक की नहीं साथ में करोड़ो लोगो की जो उनसे मोहब्बत करते है. लोग दुआए मांग रहे थे,प्रार्थना कर रहे थे और अमिताभ बच्चन बेंगलुरु के फिलोमेना हॉस्पिटल में ज़िन्दगी और मौत से जंग लड़ रहे थे.

26 जुलाई सन 1982 की श्याम जब बेंगलुरु यूनिवर्सिटी में फिल्म "कुली" की शूटिंग चल रही थी. जिसमे एक स्टंट सिन होना था. अमिताभ बच्चन ने सिन में जान डालने के लिए खुद ही स्टंट करने का फैसला किया. ये सिन एक लड़ाई की थी जिसमे महानायक अमिताभ बच्चन और विलेन पुनीत इस्सर के बिच धुएं-धार फाइट हो रही थी. तभी एक बेहद खतरनाक मुक्का सीधे अमिताभ बच्चन के पेट में जा लगा.


घटना के तुरंत बाद अमिताभ बच्चन को बेंगलुरु के फिलोमेना हॉस्पिटल भर्ती कराया गया. डॉक्टर इलाज कर रहे थे, मगर हालत में कोई सुधार नहीं आया. उधर मुंबई से उनकी पत्नी दो स्पेस्लिस्ट डॉक्टर के साथ बेंगलुरु रबना हो गए थे. इस दरमियान हॉस्पिटल के डॉक्टर जोजेफ अन्थोनी उनका ऑपरेशन कर चुके थे और ऑपरेशन को सफल बताया. मगर इसके बाद भी उनकी हालत नहीं सुधरी और बिगड़ती चली गई. एक बक्त ऐसा आया जब डॉक्टर ने सारी उम्मीद छोड़ दी थी और डॉक्टर ने कहा परिवार वालो से उम्मीद कम है मुलाकात कर लो.
लेखिन उनकी पत्नी जया बच्चन हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने लिया एक बड़ा और जोखिम भरा फैसला. जया बच्चन ने अमिताभ को उसी हालत में मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ले जाने का फैसला किया. अमिताभ बच्चन को हवाई जहाज के द्वारा मुंबई ले जाना था, लिहाजा हवाई की सीट उखाड़ी गई और फर्श पर लिटा कर रात को एक बजे मुंबई ले जाया गया. अब महानायक मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती थे और लन्दन से दो स्पेस्लिट डॉक्टर अपने औजार के साथ मुंबई पहुंच चुके थे.
मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में दूसरी बार महानायक का ऑपरेशन हुआ मगर उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. आंत फट जाने के कारण पेट में पस और खतरनाक एंजाइम निकल रहे थे जो धीरे-धीरे में फैल रहे थे, और इसका असर शरीर के कई भागो पर पड़ रहा था. इलाह के दरमियान कई बार अमिताभ की सांसे रुक जाती थी और दिल की धड़कने भी बंद हो जाती थी. मीडिया में अमिताभ की मौत की खबरे आने लगी थी मगर डॉक्टर ने अभी हार नहीं मानी थी. उनकी धरकने फिर अपने आप लौट आती थी.
जब हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने फिरसे एक ऑपरेशन की तैयारी की और तीसरी बार अमिताभ बच्चन का ऑपरेशन किया गया. एक के एक ऑपरेशन से उनके हालत नाजुक होते जा रहे थे. डॉक्टर ने एक खास तकनीक से इसबार उनके घाव को सूखा कर ताका भी लगा दिया मगर अभी भी हुनकी हालत नाजुक बनी थी. दूसरी तरफ इस घटना के लिए मिडिया में और लोग जगत में पूरी तरह से पुनीत इस्सर को जिम्मेदार माना जा है रहा था, जिससे पुनीत इस्सर टूट गए थे. उन्हें कई फिल्म से निकाल दिया गया था. इधर अमिताभ बच्चन अपने जीवन की जंग लड़ रहे थे.
मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में पुरे 59 मौत से जंग लड़ने के बाद महानायक अमिताभ बच्चन ने ज़िन्दगी की जंग जीत ली. और उन्होंने अपना व्यान दे कर पुनीत को बेकसूर बताया, इस घटना को उन्होंने एक अनहोनी माना. वो दिन है और आज का दिन है इसके बाद अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा.
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